सांचेत ग्राम अंडिया हनुमान मंदिर बगीचा में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा की दूसरे दिन बुधवार को कथावाचक पंडित शिवराज कृष्ण शास्त्री द्वारा नाराज चरित्र की कथा का वाचन किया गया कथावाचक पंडित शिवराज कृष्ण शास्त्री जी ने कथा के माध्यम से नागर जी के जीवन के बारे में भक्तों को बताया नारद मुनि हिन्दू शास्त्रों के
अनुसार, ब्रह्मा के सात मानस पुत्रों में से एक माने गये हैं। ये भगवान विष्णु के अनन्य भक्तों में से एक माने जाते है। ये स्वयं वैष्णव हैं और वैष्णवों के परमाचार्य तथा मार्गदर्शक हैं। ये प्रत्येक युग में भगवान की भक्ति और उनकी महिमा का विस्तार करते हुए लोक-कल्याण के लिए सर्वदा सर्वत्र विचरण किया करते हैं। भक्ति तथा संकीर्तन के ये आद्य-आचार्य हैं। इनकी वीणा भगवन जप 'महती' के नाम से विख्यात है। उससे 'नारायण-नारायण' की ध्वनि निकलती रहती है। इनकी गति अव्याहत है। ये ब्रह्म-मुहूर्त में सभी जीवों की गति देखते हैं और अजर-अमर हैं। भगवद-भक्ति की स्थापना तथा प्रचार के लिए ही इनका आविर्भाव हुआ है। उन्होंने कठिन तपस्या से ब्रह्मर्षि पद प्राप्त किया है। देवर्षि नारद धर्म के प्रचार तथा लोक-कल्याण हेतु सदैव प्रयत्नशील रहते हैं। इसी कारण सभी युगों में, सब लोकों में, समस्त विद्याओं में, समाज के सभी वर्गो में नारद जी का सदा से प्रवेश रहा है। मात्र देवताओं ने ही नहीं, वरन् दानवों ने भी उन्हें सदैव आदर दिया है। समय-समय पर सभी ने उनसे परामर्श लिया है।कथा में वीच वीच में सुंदर भजन की प्रस्तुति से भक्तों का मन मोह ललचा जा रहा है कथावाचक शिवराज कृष्ण शास्त्री ने कथा के मामाध्यम से बताया श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान: नाम लेने से गलत रास्ते पर चलने वाले को भी प्राप्त होंगे भगवान उन्होंने अजामिल कयादू के कथा का वर्णन करते हुए कहा कि उनके यहां संतो का आगमन हुआ। उन्हें केवल अपने ह आगमन हुआ। उन्हें केवल अपने होने वाले पुत्र का नाम नारायण रखने को कहते हैं। बालक होने पर उसे अरे नारायण, कहां हो नारायण, कुछ भी करे नारायण अन्त समय में पुत्र मोह के कारण से नारायण नारायण सच्चे ह्रदय से निकलने के कारण उस अधर्मी का भी उद्धार हो जाता है
केवल नाम लेने से गलत रास्ते पर चलने वाले को भी भगवान प्राप्त होते है। उन्होंने श्रीमद्भागवत में मानव जीवन के उद्धार के लिए कई कथाओं का वर्णन किया जीव जीवन जीने की कला भी बताई। कई भजनों द्वारा लोगों को आनंदित किया।
राम नाम की महिमा का किया गया वर्णन:
पंडित शिवराज कृष्ण शास्त्री द्वारा श्री रामचरितमानस का मंगलमय कथा करते हुए राम नाम की महिमा का वर्णन किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि सत्संग जीवन में क्यों जरूरी है। भगवान शंकर ने भारद्वाज ऋषि के पास बैठकर कथा सुनने आए यही बताते हैं कि नीचे बैठकर कथा सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोग आजकल टीवी में सत्संग सुनते हैं लेकिन सत्संग मैं कोई ना कोई घर में बाधाएं आती हैं, लेकिन कथा में शहर या गांव में कहीं भी कथा हो वहां आकर एकाग्र चित्त कथा का श्रवण करने से विशेष लाभ होता है जीवन में परिवर्तन आ जाता हैं कथा सुनने के लिए विशेष अतिथि में सांचेत सरपंच पंडित देवकिशन शर्मा पंडित वृजमोहन चोवे संजय शर्मा वेरसिया बाले मर घटिया महावीर मंदिर शाहजहानाबाद भोपाल मंदिर के पुजारी पंडित सर्वेश शास्त्री पंडित नितेश शर्मा पंहुचे।
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