तीन जून शुक्रवार को होगा नौतपा का समापन्न

तीन जून शुक्रवार को होगा नौतपा का समापन्न
संवाददाता सतीश मैथिल
सांचेत 25 मई को सूर्य देव के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश से नौतपा हुए थे शुरू जो कि तीन जून को समाप्त हो रहे है पंडित कृष्णा मैथिल ब्राह्मण तोपपुरा विदिशा द्वार बताया की 25 मई को सूर्य देव प्रातः 7 बजकर 5 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश किया और 15 दिनों तक इसी नक्षत्र में स्थित रहेंगे। रोहिणी नक्षत्र में सूर्यदेव के प्रवेश से नौतपा भी प्रारंभ हो गए। नौतपा से आशय सूर्य का नौ दिनों तक अपने सर्वोच्च ताप में होना है यानि इस दौरान गर्मी अपने चरम पर होती है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक चंद्र देव रोहिणी नक्षत्र के स्वामी हैं, जो शीतलता का कारक हैं, परंतु इस समय वे सूर्य के प्रभाव में आ जाते हैं।
सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में आने का प्रभाव
ज्योतिष गणना के मुताबिक गुरु व शनि की वक्री चाल के चलते नौतपा खूब तपे लेकिन 30 मई को शुक्र अपनी ही राशि वृषभ में अस्त हो रहा है जिसके कारण गर्मी में कमी आतीहै। हालांकि नौतपा के आखिरी दो दिनों के भीतर आंधी तूफान व बारिश होने की संभावना भी रहती है। दरअसल, शुक्रदेव रस प्रधान हैं, जो सूर्य के ताप को कम करते है।
नौतपा क्या होता है?
ज्योतिष गणना के अनुसार, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 15 दिनों के लिए आता है तो उन पंद्रह दिनों के पहले नौ दिन सर्वाधिक गर्मी वाले होते हैं। इन्हीं शुरुआती नौ दिनों को नौतपा के नाम से जाना जाता है। खगोल विज्ञान के अनुसार, इस दौरान धरती पर सूर्य की किरणें सीधी लम्बवत पड़ती हैं। जिस कारण तापमान अधिक बढ़ जाता है। कई ज्योतिषी मानते हैं कि यदि नौतपा के सभी दिन पूरे तपें, तो यह अच्छी बारिश का संकेत होता है।
मान्यता के अनुसार, नौतपा का ज्योतिष के साथ-साथ पौराणिक महत्व भी है। ज्योतिष के सूर्य सिद्धांत और श्रीमद् भागवत में नौतपा का वर्णन आता है। कहते हैं जब से ज्योतिष की रचना हुई, तभी से ही नौतपा भी चला आ रहा है। सनातन सस्कृति में सदियों से सूर्य को देवता के रूप में भी पूजा जाता रहा हैं

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