एडिटर इन चीफ अभिषेक मालवीय 7477071513
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय मुखर्जी नगर में कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें अपर सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार राठी जी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जीवन में मुक्ति चीज है तो वह है शांति व्यक्ति के पास पैसा है बंगला है गाड़ी है लेकिन शांति नहीं शांति के लिए वह चारों ओर भटक रहा है मैं मानता हूं कि अगर सच्ची शांति कहीं मिल पा रही है तो ब्रह्माकुमारीज में आकर के मिल पा रही हैं मेरा दो दिन के लिए माउंट आबू जाना हुआ था और मैंने सच्ची शांति महसूस की है। ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी ने ईश्वर सर्वव्यापी नहीं है विषय पर गीता के आधार पर अपने विचार रखते हुए कहा कि गीता में कहा गया है मैं तुम्हारा पिता हूं पिता का भी पिता हूं सारे जगत का पिता हूं गीता अध्याय 9 के श्लोक 17, गीता के प्रथम पृष्ठ पर ही तुम ही हो माता पिता तुम ही हो, कहा गया है। उसको गॉडफादर भी कहा जाता है उसी को परमपिता भी कहा जाता है। गीता में कहा गया है मैं तुम्हारा गुरु हूं, गुरुओं का भी गुरु, सारे जगत का गुरु अध्याय 11 श्लोक 43, मैं तुम्हारा गाइड मार्गदर्शक हूं। अध्याय 13 श्लोक 22, सूर्य और तारागढ़ की भी पार वही मेरा निवास स्थान है अध्याय 15 श्लोक 6, रहने के स्थान को ब्रह्मा निर्माण, ब्रह्म भुवन, परमधाम या ब्रह्म निर्माण कहा गया है अध्याय 5 श्लोक 25, अध्याय 8 श्लोक 16, अध्याय 8 श्लोक 21, अध्याय 14 श्लोक 4, जब-जब धर्म की ग्लानि होती है तब तब मैं आता हूं अध्याय 4 श्लोक 7, आत्मा को परमात्मा थोड़े ही कहेंगे जीवात्मा कहा जाता है जीव परमात्मा नहीं कहा जाता फिर परमात्मा सर्वव्यापी कैसे हो सकता है। कहा भी जाता है पतित आत्मा पावन आत्मा परमात्मा कभी नहीं सुना है सर्व के अंदर परमात्मा होता तो पतित परमात्मा हो जाए। परमात्मा तो सर्वव्यापी हो ही नहीं सकता जिसके लिए कहते हैं सबका सद्गति दाता तो क्या वह भी दुर्गति को पाते हैं। परमात्मा कभी दुर्गति को पाता है क्या। सर्व का भगवान बाप तो एक है या सभी भगवान है। बाप को याद भी करते हैं दुखहर्ता सुखकर्ता फिर भी ईश्वर सर्वव्यापी कह देते हैं। देह के सब संबंध त्याग कर मामेकम याद करो परंतु देह के संबंध तो कृष्ण को भी हैं। हम आत्मा हैं परमात्मा नहीं है ना हमारे में परमात्मा व्यापक है सब में आत्मा व्यापक है आत्मा शरीर के आधार से पाठ बजाती है। परमात्मा सर्वव्यापी कहने से सब बाप हो जाते हैं बरसे का हक नहीं रहता। सब में आत्मा है फिर कैसे कहते हमारे में परमात्मा है फिर तो सब फादर हो गए। न्यायाधीश मनोज कुमार राठी जी का ब्रह्माकुमारी बहनों के द्वारा गुलदस्ता, पगड़ी, पटका आदि से स्वागत किया गया ब्रह्माकुमारी रुकमणी दीदी ने सभी को मेडिटेशन कराया।
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