ग्राम पंचायतों के चुनाव टालना भाजपा सरकार का अलोकतांत्रिक कदम - विधायक शशांक भार्गव

ग्राम पंचायतों के चुनाव टालना भाजपा सरकार का अलोकतांत्रिक कदम - विधायक शशांक भार्गव
ब्लाक कांग्रेस विदिशा ग्रामीण ने पंचायती राज स्थापना दिवस पर की संगोष्ठी़
विदिशाः- पंचायती राज के स्थापना दिवस के अवसर पर ब्लाक कांग्रेस कमेटी विदिशा ग्रामीण एवं गुलाबगंज द्वारा “महात्मा गांधी” के सपनो ंका पंचायती राज एवं वर्तमान स्थिति” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया। संगोष्ठी में विधायक शशांक भर्गव एवं पंचायती राज व्यवस्था में जुडे पूर्व जन प्रतिनिधियों ने अपने विचार प्रकट करते हुये भाजपा सरकार द्वारा विगत तीन वर्षांे में ़ित्रस्तरीय पंचायत चुनाव ना कराने को लेकर चिंता व्यक्त करते हुये सरकार के कदम को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुये विधायक शशांक भार्गव ने विचार प्रकट करते हुये कहा कि महात्मा गांधी मानते थे भारत की आत्मा गांवों में बसती है। इसलिए उन्होंने आजादी के साथ ग्राम स्वराज का सपना देखा था। उनके सपने को पूरा करने के लिए प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 2 अक्टूबर 1959 को पंचायती राज की शुरूआत की। कांग्रेस की सरकारों के सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों ने विभिन्न संविधान संशोधनो, अधिनियमों के माध्यम से सुदृढ त्रिस्तरीय पंचायतीराज की व्यवस्था बनाई थी। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ग्राम पंचायतों को इतने अधिकार दिए थे कि वे ग्राम स्तर पर ही चौकीदार, ऑगनवाडी कार्यकर्ता, पंचायत सचिव व जनपद के माध्यम से शिक्षको ंकी भर्ती कर सकते थे। भाजपा सरकारों ने समय समय पर पंचायतों के अधिकारों में कटौती करने के साथ साथ उन्हे ं शक्तिविहीन किया। वर्तमान भाजपा सरकार पिछले तीन वर्षांे में पंचायत चुनाव टालती आ रही है और अब अन्य पिछडा वर्ग आरक्षण खत्म कर लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझा देना इस बात का संकेत है कि भाजपा देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था समाप्त करना चाहती है। प्रदेश के प्रबुद्धजनो को आगे आकर भाजपा सरकार के अलोकतांत्रिक निर्णय का विरोध करना चाहिए।
पूर्व सरपंच प्रभुदयाल यादव, पूर्व सरपंच नंदकिशोर शर्मा ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी चाहते थे, कि लंबे समय से उपेक्षित ग्रामीण क्षेत्रों की जनता को सशक्त बनाने के लिए पंचायती राज का प्रभावी तरीके से लागू होना चाहिए। 
पूर्व सरपंच बाबूलाल वर्मा, पूर्व जनपद सदस्य रमेश तिवारी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी.नरसिंहराव ने 1952 में 73 वां एवं 74 वां संविधान संसांधन संसद में पारित करवाकर पंचायती राज को पूर्ण रूप से संवैधानिक अधिकार का दर्जा दिया।
डॉ शैलेन्द्र कटारिया, जिनेष जैन ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहनंिसह ने ही पहली बार शुरूआत कर 24 अपै्रल 2010 को राष्ट्रीय पंचायतीराज दिवस घोषित किया।
पूर्व सरपंच दीपक कपूर, मलखान मीना ने कहा कि म.प्र. के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ग्राम पंचायतों को असीमित अधिकार प्रदान करते हुये त्रिस्तरीय पंचायती राज म.प्र. में लागू किया। उन्होने कहा कि ग्रामीणों को सुलभता से न्याय मिल सके, इसलिए ग्राम न्यायलयों की स्थापना की।
इस अवसर पर शांतीमल भण्डारी, अजय दांतरे, अशा राजपूत, शहर अध्यक्ष सुरेश मोतियानी, ब्लाक अध्यक्ष अजय कटारे, दिवान किरार, शिवराज पिपरोदिया, गोविन्द भार्गव,  गोविन्दसिंह राजपूत, वीरेन्द्र राजपूत, सुरेश बाबू पाठक, अमित सोनी, देवेन्द्र दांगी, डॉ. जितेन्द्र ंिसह दांगी, सुनील रघुवंशी, रामराजसिंह दांगी, गणेश दांगी, संजीव प्रजापति, मुआज कामिल, विनोद राजपूत, मोनूपाल, किशोर सिंह रघुवंशी, निरंजनसिंह दांगी, वृजेन्द्र वर्मा, मनोज कुशवाह, केामल प्रसाद जाटव, दशरथसिंह सेन, मनीष विश्वकर्मा, हरिओम किरार, नरेन्द्र शर्मा, भोलाराम अहिरवार, गोलू शर्मा, शैलेन्द्र जाटव सहित वडी संख्या में उपस्थित वक्ताओं ने अपने विचार प्रकट किए।

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