कार्तिक सोमवती पूर्णिमा स्नान के लिए शोकलपुर संगम पर खूब लगी डुबकियां,मेले में उमड़ा जनसैवक, जयकारों से गूंज नर्मदा का तटा
,देवरी - शोकलपुर तटा पर मां नर्मदा का तीन नदियों का संगम है। इस कारण कार्तिक सोमवती पूर्णिमा पर स्नान के लिए कई जिलों के श्रद्धालु संगम स्थल पर स्नान करने के लिए पहुंचे थे। शोकलपुर तटा पर तीन दिन तक मेला लगा रहता है। परन्तु कार्तिक पूर्णिमा होने के कारण जिले सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में स्नानार्थी पहुंचे।और इन्होंने सर्द सुबह में खूब डुबकियां लगाई। संगम स्थल पर दिनभर स्नान का सिलसिला चलता रहा। घाट पर हर-हर नर्मदे के जयकारे लगते रहे। कार्तिक सोमवती पूर्णिमा पर स्नान के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे। श्रद्धालुओं ने संगम स्थल पर स्नान कर पूजा पाठ की और सत्यनारायण भगवान की कथा कराई गई। उसके बाद नर्मदा तट पर जहां देखो वहां दाल बाटी बनाकर मां नर्मदा का भोग लगाया गया कन्या भोजन कराए गए। उसके बाद मेले में पहुंचकर खरीददारी भी की गई। क्योंकि पंचक्रोशी यात्रा करने वाले श्रद्धालु भी शोकलपुर तटा पर रुके हुए थे। उन्होंने भी कार्तिक सोमवती पूर्णिमा पर स्नान किया गया।
पार्किंग व्यवस्था प्रशासन के लिए बनी रही चुनौती, चार किलोमीटर दूर से लग गया जाम, श्रद्धालुओं को पैदल निकलने में भी परेशानी,
श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग व्यवस्था न होने के कारण तीन किलोमीटर दूर से शोकलपुर तट पर पैदल जाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ा। पार्किंग व्यवस्था प्रशासन के लिए बनी रही चुनौती। क्योंकि नर्मदा तट शोकलपुर घाट पहुंचने के लिए तीन किलोमीटर दूर से ही जाम लग गया था। श्रद्धालुओं पैदल पहुंचने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। क्योंकि नर्मदा तट शोकलपुर घाट की सड़क के दोनों किनारे अतिक्रमण होने के कारण वाहन पार्किंग नहीं हो सके। और श्रद्धालुओं ने अपने-अपने वाहन सड़क के बीच ही खड़े कर दिए। जिससे पैदल जाने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। समय रहते पुलिस और राजस्व विभाग इस और ध्यान देते थे तो श्रद्धालुओं को शोकलपुर घाट पहुंचने में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। कई श्रद्धालुओं तो यह जाम का नजारा देखकर वापस लौट गए।
शोकलपुर घाट पर तीन नदियों का संगम होने के कारण यहां पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ बनी रही,
नर्मदा पुराणों में भी शोकलपुर घाट का उल्लेख मिलता है। नर्मदा क्षेत्र में सबसे ज्यादा महत्व शोकलपुर घाट के संगम पर स्नान करने का है। इसका उल्लेख पुराणों में भी बताया गया है। पूरी नर्मदा क्षेत्र में मात्र शोकलपुर घाट के संगम पर हमेशा नील जल दिखाई देता है। संगम पर स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं दूर-दूर से अमावस्या और पूर्णिमा को भी आते हैं। साल में इस संगम पर तीन बार विशाल मेला लगता है। यह संगम की यह मानता है कि जो लोगों की मनोकामना होती है वहां संगम पर स्नान करने से पूर्ण होती हैं। श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण होने पर आज के दिन यहां पर श्रद्धालु कन्या भंडारा करने के लिए भी भारी संख्या में आते हैं।
क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा दिनभर,
ग्रामीण क्षेत्र का कहना है कि जब शासन प्रशासन को यह जानकारी थी कि यहां पर प्रति वर्ष विशाल मेला लगता है। पुलिस प्रशासन और राजस्व विभाग को पार्किंग व्यवस्था पूर्ण रूप से कराई जानी चाहिए थी। दूसरी और जिम्मेदार अधिकारियों को भी यहां का निरीक्षण कर व्यवस्था दुरुस्त करनी चाहिए थी। व्यवस्थाएं दुरुस्त न होने के कारण कई श्रद्धालु बगैर स्नान करें ही रास्ते से वापस लौटना पड़ा। जिम्मेदार अधिकारी की लापरवाही और स्थानी प्रशासन की अनदेखी के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा है।


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